
समाजसेवी युनुस अंसारी बताते है रमज़ान सिर्फ़ इबादत का महीना नहीं, बल्कि किरदार निर्माण और तरबियत का भी बेहतरीन अवसर है—ख़ासतौर पर बच्चों के लिए। इस पाक महीने में घर का माहौल, मस्जिदों की रौनक, रोज़ा, नमाज़ और क़ुरआन की तिलावत बच्चों के दिलों पर गहरा असर डालती है। अगर इस दौरान सही रहनुमाई की जाए, तो बच्चों की सोच, आदतें और अख़लाक़ मज़बूत हो सकते हैं।

प्यार और समझ के साथ तरबियत: बच्चों को रमज़ान की अहमियत डर या ज़बरदस्ती से नहीं, बल्कि प्यार और समझ से बतानी चाहिए। उन्हें यह समझाया जाए कि रोज़ा भूखे रहने का नाम नहीं, बल्कि सब्र, हमदर्दी और अल्लाह की फरमाबरदारी का सबक है। छोटे बच्चों को आधे रोज़े या कुछ घंटों का रोज़ा रखवाकर धीरे-धीरे आदत डलवाई जा सकती है।

नमाज़ और इबादत की आदत: रमज़ान में बच्चों को नमाज़ की तरफ़ राग़िब करना आसान होता है। घर में जमाअत से नमाज़ पढ़ना, तरावीह के बारे में बताना और बच्चों को साथ मस्जिद ले जाना उनके दिल में इबादत की मोहब्बत पैदा करता है। अगर बच्चा पूरी नमाज़ न भी पढ़ पाए, तो उसकी कोशिश की तारीफ़ ज़रूर करनी चाहिए।

क़ुरआन से दोस्ती: यह महीना बच्चों को क़ुरआन से जोड़ने का बेहतरीन वक़्त है। रोज़ थोड़ी-थोड़ी तिलावत, आसान तरजुमा और छोटी-छोटी कहानियों के ज़रिए क़ुरआन की तालीम दी जाए। इससे बच्चों के अंदर दीन की समझ और सही-गलत की पहचान मज़बूत होती है। अख़लाक़ और आदाब की शिक्षा: रमज़ान में बच्चों को सच बोलने, बड़ों की इज़्ज़त करने, छोटों से प्यार करने और गुस्से पर काबू रखने की तालीम दी जानी चाहिए। रोज़ा हमें सिखाता है कि ज़ुबान और अमल दोनों पर काबू रखा जाए। अगर बच्चे से कोई गलती हो जाए, तो सख़्ती के बजाय नर्मी से समझाना ज़्यादा असरदार होता है। सदक़ा और हमदर्दी का जज़्बा: बच्चों को ज़रूरतमंदों की मदद करना सिखाना भी तरबियत का अहम हिस्सा है। उन्हें अपने खिलौनों, कपड़ों या जेबख़र्च से किसी गरीब की मदद करने के लिए प्रेरित करें। इससे उनके दिल में हमदर्दी, इंसानियत और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी का एहसास पैदा होता है।

अंत में युनुस अंसारी कहते है बच्चों की रमज़ान तरबियत के लिए अल्लाह की एक ख़ास नेमत है। अगर इस महीने में हम बच्चों को दीन, अख़लाक़ और इंसानियत की सही तालीम दे दें, तो यही बच्चे आगे चलकर बेहतर इंसान और नेक समाज की बुनियाद बनेंगे। रमज़ान की असली कामयाबी यही है कि यह हमारे साथ-साथ हमारी नस्लों को भी बेहतर बना दे।


