
पूर्व समाजवादी पार्टी फर्रुखाबाद के जिलाध्यक्ष,चेयरमैन पति नदीम अहमद फारूखी जी बताते है रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और अल्लाह की क़ुर्बत का महीना है। इस मुक़द्दस महीने में अदा की जाने वाली तरावीह की नमाज़ मुसलमानों के लिए विशेष महत्व रखती है। यह नमाज़ ईशा की नमाज़ के बाद अदा की जाती है और इसमें क़ुरआन मजीद को तर्तील के साथ सुनने व समझने का अवसर मिलता है।

तरावीह की नमाज़ सुन्नत-ए-मुअक्कदा है, जिसे रसूल-ए-अकरम ﷺ ने स्वयं पढ़ा और सहाबा को भी इसकी प्रेरणा दी। इस नमाज़ के ज़रिये मोमिन अपने गुनाहों की माफी की दुआ करता है और अल्लाह से रहमत व बरकत की उम्मीद रखता है। हदीस में आता है कि जो व्यक्ति ईमान और सवाब की नीयत से तरावीह पढ़ता है, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

तरावीह का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे क़ुरआन से गहरा रिश्ता बनता है। मस्जिदों में पूरा क़ुरआन सुना जाता है, जिससे दिलों में नूर पैदा होता है और अमल में सुधार आता है। साथ ही, जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ने से भाईचारा, अनुशासन और इत्तेहाद मज़बूत होता है।

अंत में नदीम अहमद फारूखी कहते है तरावीह की नमाज़ केवल एक रस्म नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और अल्लाह की इबादत का बेहतरीन ज़रिया है। हमें चाहिए कि हम पूरे ख़ुशू और ख़ुज़ू के साथ तरावीह अदा करें और इस मुक़द्दस महीने की बरकतों से भरपूर फ़ायदा उठाएँ।

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