
रमज़ान का मुबारक महीना सिर्फ रोज़ा रखने और इबादत करने का ही नहीं, बल्कि इंसानियत, हमदर्दी और जरूरतमंदों की मदद करने का भी पैग़ाम देता है। इस पाक महीने में मुसलमान अल्लाह की रज़ा हासिल करने के लिए अपने गुनाहों से तौबा करते हैं और नेकियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

नगर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष हाजी इखलाक खाँ ने कहा कि रमज़ान हमें यह एहसास दिलाता है कि समाज में बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो गरीबी और तंगी में अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। रोज़ा रखने से इंसान को भूख और प्यास का एहसास होता है, जिससे वह ग़रीबों और जरूरतमंदों के दर्द को समझ पाता है।

उन्होंने कहा कि इस महीने में ज़कात, सदक़ा और फ़ित्रा देकर गरीबों, यतीमों और बेसहारा लोगों की मदद करना हर साहिब-ए-हैसियत मुसलमान की जिम्मेदारी है। अगर हर व्यक्ति अपने आसपास के जरूरतमंदों की मदद करे, तो समाज में खुशहाली और भाईचारा बढ़ेगा।

हाजी इखलाक खाँ ने अपील की कि रमज़ान के पाक महीने में लोग ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद करें, रोज़ेदारों के लिए इफ्तार का इंतज़ाम करें और गरीब परिवारों तक राशन व जरूरी सामान पहुंचाएं। यही रमज़ान की असली रूह और इस्लाम की तालीम भी है।
उन्होंने कहा कि रमज़ान का असली मकसद सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि अपने अंदर इंसानियत, रहमदिल और भाईचारे की भावना पैदा करना है। अगर हम इस महीने में गरीबों की मदद करेंगे, तो अल्लाह तआला भी हम पर अपनी रहमतों की बारिश फरमाएगा। अगर चाहें तो मैं इसे थोड़ा छोटा या अख़बार/न्यूज़ स्टाइल में भी बना सकता हूँ।


